Fixed Deposit (FD) एक बहुत ही लोकप्रिय निवेश विकल्प है, जिसे लोग अपने पैसों को सुरक्षित रखने और निश्चित रिटर्न पाने के लिए चुनते हैं। हालांकि, FD कराने से पहले कुछ जरूरी नियमों को समझना बेहद जरूरी है, जिससे आप किसी भी प्रकार के नुकसान से बच सकें और अपने निवेश से अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें। आज हम FD से जुड़े 5 जरूरी नियमों को डीटेल में समझेंगे (Fixed Deposit Rules)।
Lock-in Period – लॉक-इन पीरियड
Fixed Deposit एक निश्चित समय के लिए किया जाता है, जिसे लॉक-इन पीरियड कहा जाता है। इस समय, आपका पैसा बैंक में लॉक रहता है और आप इसे निकाल नहीं सकते। अगर आप इस अवधि के बीच में FD तोड़ते हैं, तो आपको बैंक द्वारा निर्धारित पेनल्टी देनी पड़ सकती है।
- लॉक-इन पीरियड बैंक के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
- अगर आप बीच में पैसा निकालते हैं, तो पेनल्टी देनी पड़ सकती है।
- FD कराने से पहले बैंक की टर्म्स और कंडीशंस को अच्छे से पढ़ें।
- अगर आपको पैसों की जरूरत हो सकती है, तो छोटी अवधि की FD चुनें या फ्लेक्सी FD का ऑप्शन देखें।
Interest Rates – ब्याज दरें
बैंक समय-समय पर FD की ब्याज दरों में बदलाव करते रहते हैं। FD कराने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आपको बाजार में उपलब्ध सबसे अच्छी ब्याज दर मिल रही हो।
- हर बैंक और NBFC की FD ब्याज दरें अलग होती हैं।
- Senior citizens को आमतौर पर अधिक ब्याज दर मिलती है।
- ब्याज दरें रेपो रेट और इन्फ्लेशन के हिसाब से बदल सकती हैं।
- FD कराने से पहले विभिन्न बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करें।
वर्तमान में कुछ प्रमुख बैंकों की ब्याज दरें (2025):
Bank Name | Normal Interest Rate (%) | Senior Citizen Interest Rate (%) |
---|---|---|
SBI | 6.50% | 7.00% |
HDFC Bank | 6.75% | 7.25% |
ICICI Bank | 6.80% | 7.30% |
Axis Bank | 6.85% | 7.35% |
PNB | 6.60% | 7.10% |
Tax Implications – टैक्स इंप्लिकेशन
बहुत से लोग यह सोचते हैं कि FD पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से उनका मुनाफा होता है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। अगर आपका FD से मिलने वाला सालाना ब्याज ₹40,000 (Senior Citizens के लिए ₹50,000) से अधिक होता है, तो TDS (Tax Deducted at Source) कटेगा।
- अगर आपकी कुल आय टैक्स स्लैब में नहीं आती, तो आप Form 15G/15H भरकर TDS कटने से बच सकते हैं।
- ब्याज पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होता है।
- पोस्ट ऑफिस की 5 साल की FD में निवेश करने पर धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिल सकती है।
Auto-Renewal – ऑटो-रिन्युअल
कई बैंक FD की मेच्योरिटी के बाद उसे ऑटो-रिन्युअल कर देते हैं, जिसका मतलब है कि FD को फिर से नए ब्याज दर पर चालू कर दिया जाता है। यह ब्याज दर पहले की तुलना में कम हो सकती है।
- FD खोलते समय ऑटो-रिन्युअल का ऑप्शन डिसेबल कराएं।
- मेच्योरिटी डेट के करीब बैंक से संपर्क करें और FD को मैन्युअली रिन्यू करें या रकम निकाल लें।
- अगर नई ब्याज दर कम है, तो दूसरे बैंक में FD कराने का विकल्प भी देखें।
Flexible FD Options – फ्लेक्सिबल FD चुनें
कई बार हमें अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाती है और ऐसे में FD को तोड़ना महंगा पड़ सकता है। इसलिए, फ्लेक्सिबल FD या Sweep-in FD का विकल्प चुनना बेहतर होता है।
- यह आपके सेविंग अकाउंट से लिंक रहता है।
- जरूरत पड़ने पर आप FD से बिना तोड़े पैसे निकाल सकते हैं।
- इसपर आपको सेविंग अकाउंट से ज्यादा ब्याज मिलता है।
- यह विकल्प HDFC Bank, ICICI Bank, SBI और कई अन्य बैंकों में उपलब्ध है।
ये हैं 5 Fixed Deposit Rules यानि FD से जुड़े 5 बड़े नियम जिसे जानना आपके लिए बहुत जरूरी है।
FD कराने से पहले ध्यान देने योग्य बातें:
- अपनी जरूरत के अनुसार FD की अवधि तय करें।
- ब्याज दर की तुलना करके ही FD कराएं।
- TDS और टैक्स छूट के बारे में जानकारी लें।
- FD के ऑटो-रिन्युअल नियम को समझें।
- अगर जरूरत हो तो स्वीप-इन FD का विकल्प चुनें।
FD निवेश का एक सुरक्षित और भरोसेमंद तरीका है, लेकिन इसके कुछ नियमों को समझना बेहद जरूरी है (Fixed Deposit Rules)। लॉक-इन पीरियड, ब्याज दरें, टैक्स, ऑटो-रिन्युअल, और फ्लेक्सिबल FD जैसे पहलुओं पर ध्यान देकर आप अपने निवेश को ज्यादा फायदेमंद बना सकते हैं।
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